धान के सभी खरपतवार खत्म करने की दवा, बड़ी घास भी होगी साफ? जानें सही तरीका

Weeds in paddy – धान की फसल में खरपतवार किसानों के लिए बड़ी समस्या बन सकते हैं। धान की रोपाई या सीधी बुवाई के कुछ ही दिनों बाद खेत में सांवा, मोथा, दूब और दूसरी चौड़ी पत्ती वाली घास उगने लगती है। समय पर नियंत्रण न किया जाए तो ये खरपतवार खाद, पानी और पोषक तत्वों में धान के पौधों से प्रतिस्पर्धा करते हैं, जिससे फसल की बढ़वार और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं। बड़ी घास को नियंत्रित करने के लिए केवल कोई एक दवा चुनना पर्याप्त नहीं है, बल्कि खरपतवार की पहचान, फसल की अवस्था और दवा के सही समय का ध्यान रखना जरूरी है।

धान में खरपतवार खत्म करने के लिए कौन सी दवा काम आती है?

धान में खरपतवार नियंत्रण के लिए अलग-अलग सक्रिय तत्व वाली खरपतवारनाशी दवाएं इस्तेमाल की जाती हैं। उदाहरण के लिए Pretilachlor और Butachlor जैसी दवाओं का उपयोग आम तौर पर खरपतवार उगने की शुरुआती अवस्था में किया जाता है। वहीं खड़ी फसल में घास और कुछ दूसरी खरपतवार प्रजातियों के नियंत्रण के लिए Bispyribac Sodium, Penoxsulam या अन्य पंजीकृत पोस्ट-इमर्जेंस हर्बिसाइड इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

हालांकि किसान किसी भी दवा का चुनाव केवल नाम देखकर न करें। खेत में मौजूद खरपतवार की प्रजाति और धान की किस्म के आधार पर दवा बदल सकती है। हमेशा उत्पाद के लेबल पर दी गई फसल, खरपतवार और मात्रा संबंधी जानकारी को प्राथमिकता दें।

बड़ी घास को कैसे करें नियंत्रित?

यदि खेत में खरपतवार काफी बड़े हो चुके हैं, तो शुरुआती अवस्था में इस्तेमाल होने वाली दवा से अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सकता। ऐसी स्थिति में खेत का निरीक्षण करके यह पहचानना जरूरी है कि खरपतवार घास वर्ग का है, चौड़ी पत्ती वाला है या मोथा वर्ग का। इसके बाद उसी खरपतवार पर प्रभावी पंजीकृत हर्बिसाइड का चयन किया जाना चाहिए। बहुत ज्यादा बड़ी घास वाले हिस्सों में हाथ से निराई या यांत्रिक नियंत्रण भी उपयोगी हो सकता है।

खरपतवारनाशी दवा छिड़कते समय रखें ये सावधानियां

  • दवा की मात्रा हमेशा कंपनी के लेबल और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार रखें।
  • जरूरत से अधिक मात्रा में हर्बिसाइड डालने से धान की फसल को नुकसान हो सकता है।
  • तेज हवा या बारिश की संभावना होने पर छिड़काव से बचें।
  • पोस्ट-इमर्जेंस दवा का छिड़काव करते समय खरपतवार सक्रिय बढ़वार की अवस्था में होना चाहिए।
  • अलग-अलग दवाओं को अपनी तरफ से मिलाकर टैंक मिक्स न बनाएं।

सही समय पर नियंत्रण से मिलेगा बेहतर परिणाम

धान में खरपतवार नियंत्रण का सबसे अच्छा परिणाम तब मिलता है जब किसान खेत की लगातार निगरानी करते हैं। खरपतवार छोटे रहने पर उन्हें नियंत्रित करना आसान होता है, जबकि बहुत बड़ी घास के लिए ज्यादा मेहनत और सही चयन वाले हर्बिसाइड की जरूरत पड़ सकती है। किसी भी खरपतवारनाशी को खरीदने से पहले यह भी जांच लें कि वह धान की फसल के लिए पंजीकृत है या नहीं।

खरपतवार प्रबंधन और कृषि से जुड़ी तकनीकी जानकारी के लिए किसान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं:
Indian Council of Agricultural Research (ICAR)

नोट: खरपतवारनाशी की सटीक मात्रा उत्पाद, फॉर्मूलेशन, धान की खेती की विधि और खेत की स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए प्रयोग से पहले उत्पाद का लेबल पढ़ें और नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि अधिकारी से सलाह लें।

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