धान के सभी खरपतवार खत्म करने के लिए किसान तुरंत अपनाएं ये तरीका : Paddy Weed Control

धान की खेती करने वाले किसानों के लिए खरपतवार एक बड़ी समस्या होते हैं। खेत में उगने वाले अनचाहे पौधे धान की फसल के साथ पानी, खाद, धूप और पोषक तत्वों के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। यदि समय रहते इन पर नियंत्रण नहीं किया जाए तो पौधों की बढ़वार कमजोर हो सकती है और उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में किसानों को धान की शुरुआती अवस्था से ही खरपतवार प्रबंधन पर ध्यान देना चाहिए।

धान की फसल में सबसे ज्यादा कब नुकसान करते हैं खरपतवार?

धान की फसल में रोपाई या बुवाई के बाद शुरुआती 20 से 45 दिन खरपतवार नियंत्रण के लिए काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इसी समय खरपतवार तेजी से बढ़ते हैं और धान के छोटे पौधों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं।

अगर किसान इस अवधि में खेत को साफ रखते हैं तो धान की फसल को बेहतर तरीके से बढ़ने का मौका मिलता है। खेत में खरपतवार बहुत ज्यादा बढ़ जाने के बाद उन्हें नियंत्रित करना मुश्किल और महंगा दोनों हो सकता है।

पहले पहचानें खेत में किस प्रकार का खरपतवार है

धान के खेत में मुख्य रूप से घास वर्ग, चौड़ी पत्ती वाले और मोथा वर्ग के खरपतवार पाए जाते हैं। हर प्रकार के खरपतवार पर एक ही दवा समान रूप से काम नहीं करती।

इसी वजह से किसी भी खरपतवारनाशी का इस्तेमाल करने से पहले खेत में मौजूद खरपतवार की पहचान करना जरूरी है। किसान चाहें तो स्थानीय कृषि विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग से भी इसकी पहचान करा सकते हैं।

खरपतवार नियंत्रण के लिए अपनाएं यह तरीका

धान की फसल में खरपतवार नियंत्रण के लिए एक ही उपाय पर निर्भर रहने के बजाय Integrated Weed Management अपनाना बेहतर रहता है। इसमें हाथ से निराई, यांत्रिक उपकरण और जरूरत के अनुसार खरपतवारनाशी का उपयोग किया जाता है।

छोटे खेतों में समय पर हाथ से निराई-गुड़ाई काफी प्रभावी हो सकती है। रोपाई वाले धान में खेत की स्थिति के अनुसार cono weeder जैसे उपकरण भी उपयोग किए जा सकते हैं। इससे खरपतवार हटने के साथ मिट्टी में हवा का संचार भी बेहतर होता है।

खरपतवारनाशी का सही समय पर करें इस्तेमाल

धान की फसल में खरपतवारनाशी मुख्य रूप से pre-emergence और post-emergence श्रेणी में इस्तेमाल किए जाते हैं। दवाओं का प्रयोग खरपतवार निकलने से पहले या उनकी बहुत शुरुआती अवस्था में किया जाता है।

वहीं पहले से उग चुके खरपतवारों के नियंत्रण के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। कौन-सी दवा इस्तेमाल करनी है, यह धान की बुवाई की विधि, खरपतवार की प्रजाति और फसल की अवस्था पर निर्भर करता है।

दवा की मात्रा में न करें गलती

किसान अक्सर यह मान लेते हैं कि ज्यादा मात्रा में दवा डालने से खरपतवार जल्दी खत्म होंगे, लेकिन ऐसा करना नुकसानदायक हो सकता है। अधिक मात्रा में herbicide डालने से धान के पौधों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

इसलिए हमेशा उत्पाद के लेबल पर दी गई मात्रा, पानी की मात्रा और छिड़काव के समय का पालन करें। बिना सलाह के दो अलग-अलग दवाओं को मिलाकर स्प्रे करने से भी बचना चाहिए।

पानी का सही प्रबंधन भी है जरूरी

धान के खेत में पानी का स्तर खरपतवार नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कुछ दवाएं नम मिट्टी पर बेहतर असर करती हैं, जबकि कुछ उत्पादों के लिए विशेष पानी की स्थिति जरूरी होती है।

छिड़काव से पहले और बाद में खेत में पानी कितने समय तक रखना है, इसकी जानकारी उत्पाद के लेबल से जरूर लें। तेज हवा, भारी बारिश या अत्यधिक गर्मी के समय छिड़काव करने से भी बचना चाहिए।

धान में खरपतवार नियंत्रण का सबसे अच्छा तरीका है कि किसान शुरुआत से ही खेत की निगरानी करें, खरपतवार की सही पहचान करें और समय पर निराई या उपयुक्त पंजीकृत herbicide का प्रयोग करें। किसी भी दवा के इस्तेमाल से पहले स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह और उत्पाद के लेबल निर्देशों को प्राथमिकता देना फसल की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।

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